में. मां नाथलदाई क्रशर उद्योग ग्राम टिमरलगा के संचालक की मनमानी!! लीज पर खनन नहीं फिर भी करोड़ों की रॉयल्टी पर्ची जारी???
खनिज रिकॉर्ड में 2011 से 2041 तक खनन करने का अनुमति दिए है,, लेकिन खनन केवल कागज पर

सारंगढ़ जिले में गौण खनिज के अवैध कारोबार का एक और बड़ा मामला सामने आया है। जहां पर मां नाथलदाई क्रशर उद्योग संचालक पर आरोप है कि खनिज विभाग से स्वीकृत चिन्हांकित लीज स्थान पर आज तक खनन नहीं हुआ,,,लेकिन कागजों में करोड़ों रुपये की रॉयल्टी पर्ची जारी हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ सरकार लगातार अवैध खनन करने वाले खनिज माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिये हैं जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके, लेकिन यहां तो पूरा का पूरा मामला ही उल्टा नज़र आ रहा है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ शासन की आंखों में धूल झोंककर प्रशासन को इसकदर चुना लगाया जा रहा है कि देखने में सबकुछ ठीक ही नजर आता है लेकिन पर्दे के पीछे क्या चल रही है इसकी कल्पना तो तभी संभव है जब उचित जांच की प्रक्रिया लीज पर और खनन की अनुमति दिए गए जगहों का खनिज विभाग की टीम द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।
आपको बता दें कि सम्बन्धित गौण खनिज एरिया में माफियाओं जखीरा काफ़ी सक्रिय है जहां खनन माफिया बिना किसी डर के खुले आम अपना काला बाजार चला रहे हैं। स्वाभाविक सी बात है कि जहां विभागों के द्वारा माफियाओं को संरक्षण देकर उनके द्वारा अवैध गतिविधियों को न रोककर अथवा अंकुश ना लगाकर उसे अपना नेतृत्व प्रदान कर अवैध कमाई का जरिया बनाया जा रहा है।
खनिज विभाग के रिकॉर्ड में टिमरलागा के जिस खसरा नंबर पर मां नाथल दाई क्रशर को लाइमस्टोन/पत्थर खनन संबंधित लीज दी गई है, वहां मौका-मुआयना करने पर देखा जा सकता है कि उक्त स्थान पर खनन का कोई भी आपको निशान तक नहीं मिल सकता क्यूंकि विभाग द्वारा खनन मंजूरी दी गई जगह/स्थान पर अब तक किसी भी प्रकार की खुदाई ही नहीं हुई है, और जमीन जस की तस पढ़ी है और अपने क्रेशर के लिए खनिज माफियाओ से गुड़ेली टिमरलगा से अवैध पत्थरों की खरीदी कर अपने लीज के नाम से खनिज विभाग से लगातार रॉयल्टी पर्चियां ले रहा हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ गौण खनिज अधिनियम 2015 के तहत लीज क्षेत्र से बाहर खनन करना और बिना कोई खनन के रॉयल्टी पर्ची जारी करना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। इसमें लीज निरस्त करने के साथ-साथ जुर्माना और दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।
👉👉👉 अगर भौतिक सत्यापन में सारे आरोप सही पाए गए तो लीज निरस्त करने, जारी रॉयल्टी की वसूली और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई बनती है।
वहीं यह सूत्रों से यह भी बताया जा रहा है कि मां नाथल दाई क्रशर उद्योग के संचालक बड़े पहुंचे हुए व्यक्ति हैं जिन्होंने आज तक अपने वैध लीज के जगह से चूना पत्थर खनन किया ही नहीं और लाखों करोड़ों के रॉयल्टी पर्ची जारी करवा लिए जिससे संचालक के धनबल और राजनीतिक पावर पता चलता है।
यह आरोप है कि विभागों की मिलीभगत से यहां सब कुछ व्यवस्थित चलता है और सारंगढ़ अब अवैध कारोबार का अड्डा बन चुकी है। यहां पर देखने वाली बात यह है कि यहां कोई कार्यवाही होना तो दूर की बात है उसपर किसी भी प्रकार की कोई सुध ही नहीं ली जाती, मामला चाहे जिलाधिकारी के संज्ञान में भी क्यों न हो, कोई भी कार्यवाही तो होनी नहीं। *उच्च अधिकारियों पर अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति विमुखता या तो किसी सांठगांठ की ओर इशारा करती है अथवा राजनीतिक दबाव की ओर संकेत करती हुई नज़र आ रही है
अब देखने वाली बात होगी कि खनिज विभाग कार्रवाई करता है या फिर मामला फाइलों में दब जाता है।