जिले के प्रसिद्ध गौण खनिज क्षेत्र ग्राम पंचायत गुड़ेली-टिमरलगा के अवैध खदानों मे बिना कोई वैध अनुमति के बारूद खेल सालों से लगातार चलता आ रहा है। जिसका विभागीय क्षेत्र से बारूद द्वारा अवैध खदान पर ब्लास्टिंग करने का अनुमति नहीं दी जाती है। और यहां संगीन अपराध की श्रेणी में भी आता है, लेकिन ग्राम पंचायत टिमरलगा में उमेश के खदान से सिर्फ खनन नहीं , बल्कि पूरे धरती के छाती चीर कर लाखों टन अवैध रूप से पत्थर रोजाना निकालकर क्रेशर में बेचा जा रहा है और अवैध खनन से शासन को राजस्व का लाखों-करोड़ों चूना लगाया जा रहा है।
उच्च अधिकारियों के संज्ञान में होते हुए भी अवैध खनन जोरों से जारी…जिस पर कोई कार्यवाही भी नहीं??
आपको बता दें कि 16 मार्च 2026 को एसडीएम वर्षा बंसल के संज्ञान में खनिज विभाग की टीम द्वारा इस अवैध खनन के खेल को तप्तीश से जांच कर लगभग 10 पोकलेन और अन्य माल वाहक हाईवा/ट्रैकों को ऑन द स्पॉट जब्त किया गया था। लेकिन माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हैं कि कार्यवाही होने के पश्चात ही उक्त अवैध खनन हो रहे भूमि जिस पर तत्कालीन एसडीएम वर्षा बंसल के द्वारा प्रशासनिक रूप से सीलबंदी हो चुका था, उसे अगले ही दिन से खनन माफियाओं द्वारा पुनः अवैध रूप से खनन संचालन किया जा रहा था और आज पर्यंत तक लगातार अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है, जो कि खनिज विभाग और जिलाधिकारी के संज्ञान में होते हुए भी आज तक किसी को भी प्रकार से रोक नहीं लगाई जा रही है। अब यह कहना लाजमी होगा कि या तो दाल में कुछ काला है, या तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है।
खनन माफियाओं के खदानों में अवैध ब्लास्टिंग से लगातर प्रभावित हो रहे आबादी क्षेत्र
आपको बता दें कि अवैध पत्थर खदान में बीते कुछ दिनों से नियमों को ताक पर रखकर हेवी ब्लास्टिंग किया जा रहा है। यह कार्य नेशनल हाईवे 200 मार्ग पर से लगभग 150 मीटर की दूरी पर ही खुदाई हो रही है। इस खुदाई और अवैध खनन से आबादी क्षेत्र लगातार इससे प्रभावित हो रहे हैं। इंसान तो दूर, बेजुबान जीव-जंतुओं पर भी कहर बरस रहा है। ब्लास्टिंग से निकलने वाली जहरीली हवा और होने वाले शोर से पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है तथा इससे जल संकट और जमीन के गहराइयों से निकलने वाली पेयजल भी प्रभावित हो रही है जिसे पानी में फैलने वाले जहरीले तत्वों से जान का खतरा और पर्यावरण पॉल्यूशन लगातार बढ़ रहा है।
अगर इसी तरह से अवैध माइनिंग लगातार इस क्षेत्र में चलता रहा तो भविष्य में आने वाले संकट से बचने के लिए लोगों का इन जगहों से पलायन करना मजबूरी हो जाएगा।
लेकिन यह समस्त बातें जिलाधिकारी के संज्ञान में होते हुए भी अपने कार्यों के प्रति विमुखता और निरंकुश्ता, आम जनजीवन को काफी महंगी पड़ रही है।
जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और संचालन को बिना किसी परेशानी के व्यवस्थित ढंग से बनाए रखने के लिए बहुत सारे जिलाधिकारी सारंगढ़ में आए और चले गए किंतु आम जन-जीवन को प्रभावित करने वाले तत्वों और नैतिक मूल्यों को ना तो समझा गया और ना ही ध्यान दिया जा रहा है। जिले की कमान संभालने के बाद बहुत से विभागीय अधिकारियों ने अवैध कार्य संचालनकर्ताओं को अपने अनैतिक लाभ के लिए लगातार छूट और बढ़ावा दिया गया। यही कारण है कि जिले में अवैध कार्य तेजी से होने लगे हैं, जिससे अवैध माईनिंग और क्रेशरों को संचालन करने वाले लोग बिना रॉयल्टी के ही सब कुछ करते रहते हैं।
जिले में माफियाओं का बढ़ता हुआ धनबल और राजनीतिक शक्तियों से संपन्न होने के कारण अवैध कार्य करने वाले लोग खुलेआम जिले में कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। विभागों द्वारा इन्हें बिना जांच किए ही रॉयल्टियां दे दी जाती है और निर्धारित खनन स्पॉट पर क्या हो रहा है और क्या नहीं! इसकी चेकिंग भी नहीं की जाती है। इसके ऐवज में माफियाओं द्वारा अन्य जगहों का भी खनन कर खनिज संपदा का खुलेआम दोहन किया जाता है और अनैतिक लाभ लिया जाता है जिससे शासन को करोड़ों की राजस्व की चपत लगती है।
अब देखना यह है कि इस मामले को बार-बार विभागीय अधिकारियों और जिला के कर्ताधर्ताओं के संज्ञान में जाने के बाद भी कब तक खनन जारी रहता है? और इसपर कोई कार्यवाही होती है या नहीं!! यह भी देखने वाली बात है।