खनिज विभाग सारंगढ़ का कौन बनेगा करोड़पति ऑफर…टिमरलगा में माफियाओं को मिल रहा खनिज विभाग का खुला संरक्षण…??!
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के बहुत से हिस्सों को प्रकृति ने अपने अमूल्य खनिज संपदा से भरपुर और एक सुंदर सा पर्यावरण समस्त जीवों को तोहफे में दिया है। सारंगढ़ कुछ हिस्सों के (खनिज क्षेत्रों के अंतर्गत) पंचायत में खनिज संपदा काफ़ी प्रचूर मात्रा में है।
जिसका लाभ पंचायतों से लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को सीधा-सीधा मिलता है। जो लीज धारक से रॉयल्टी का 30% अतिरिक्त टैक्स के रूप में सरकार और पंचायतों को वैध खनिज खनन से DMF फंड के रूप में जमा होता है। यह पैसा सिर्फ खनन से प्रभावित गांवों और क्षेत्रों में क्षतिपूर्ति और आम जनजीवन को प्रभाव से बचाने के लिए सहयोग के रूप में खर्च किया जाता है। जैसे सड़क, स्कूल, पानी टंकी, आंगनबाड़ी इत्यादि जिससे खनन प्रभावित क्षेत्र को सहयोग के साथ कुछ लाभ मिल जाता है। किंतु खनन माफियाओं के द्वारा अवैध खनन करके खनिज विभाग और पर्यावरण विभाग से लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को राजस्व का सीधा-सीधा नुकसान पहुंचाया जाता है। यह राजस्व कर के रूप में लाखों-करोड़ तक का कारोबार होता है।

[जिला सहायक खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा और आर आई दीपक पटेल को लगातार सूचना देने पर भी कार्यवाही तो दूर की बात है अपने कम्फर्ट जोन से बाहर भी नहीं निकलते ]
वर्तमान समय में ग्राम पंचायत टिमरलगा में उमेश पटेल के द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के निर्धारित नियमों की धज्जियां उड़ते हुए अवैध खदान जोरों से चला रहा है। जिससे सरकार को प्रति माह लाखों करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस पर अंकुश लगाने की बजाय उसमें अपना कमिशन ढूंढ रहे हैं।
ऐसे ही उमेश पटेल जैसे कितने ही खनन माफियाओं ने जिले में अपने धनबल, राजनीतिक प्रभावों और दबंगई से अपने अवैध गतिविधियों का साम्राज्य बनाए बैठे हैं जिस पर खनिज विभाग के अधिकारी अंकुश नहीं लग पा रहे हैं और उन्हीं के सहयोग से अपना अनैतिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। तो अब आप समझ चुके होंगे की राज्य सरकार के आर्थिक व्यवस्था क्या होगा??

हर महीने राज्य सरकार अपनी करोड़ों के राजस्व के संपत्ति का नुकसान इन भ्रष्ट विभागीय अफसरों की वजह से कर रही है जो अपने अनैतिक लाभ की वजह से अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही तरीके से नहीं करते हैं। अगर ऐसा ना होता तो आज जिले में तमाम जगह पर अवैध खनन का कारोबार जोरों शोरों से हो रहा है उस पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रही है और लगातार यह सिलसिला और भी क्यों बढ़ता जा रहा है???* जिसका संपूर्ण जवाबदारी खनिज विभाग को है लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी इस पर एक्शन लेना तो दूर अपने ऑफिस से निकलना भी जरूरी नहीं समझते? इसके चलते आज जिला भर में ताबड़ तोड़ अवैध खदान संचालित हो रहा है। जोकि मामले की असल सच्चाई ऑन द स्पॉट जाकर देखा जा सकता है।
*टिमरलगा में अवैध खनन के सरताज उमेश भाऊ की कमाई व खनन के कुछ समीकरण सामने आया है*

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत टिमरलगा में उमेश पटेल को अब पुष्पा भाऊ के नाम से जाने जाते हैं। बता दे कि उमेश पटेल के अवैध खदान पर एक साथ दस दस पोकलेन मशीन से अवैध खनन किया जाता है। इन पत्थरों को गुड़ेली टिमरलगा के क्रशरों में पत्थर को बेचा जाता है, पत्थर बेचने के लिए लगभग 20 से 25 हाईवा का इस्तेमाल किया जाता है। एक हाईवे पर लगभग 30 से 35 टन पत्थर का वजन आता है वही एक टन पत्थर भाव 250 क्रेशर संचालक को प्रति टन के हिसाब से देना पड़ता है उसे हिसाब से अगर आंकड़ा लगाया जाए तो प्रतिदिन का लगभग 4000 टन और 8 से 10 लख रुपए का कमाई सामने आई है। सोचिए जरा इतना बड़ा अवैध कांड बिना अधिकारियों के सहमति के बिना संभव है कैसे???