सारंगढ़: श्रमिक की मौत के बाद क्रेशर सील पहले क्यों नहीं?!! बाबा वैद्यनाथ मिनरल्स क्रेशर सील पर कार्यवाही!
साल्हेओना तहसील सरिया स्थित बाबा वैद्यनाथ मिनरल्स क्रेशर उद्योग में एक श्रमिक की मौत ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ऐसी ही मौत की वारदात हर बार सामने देखने को मिलती है जो आम मजदूरों की बेबसी भरी कहानी बयां करती है जो मौतें सामने आ जाती है वह तो नजर आ जाता है लेकिन जो गुपचुप तरीके से छुपा दिए जाते हैं उनका क्या?
ऐसे ही एक मजदूर रवि विशाल की ड्यूटी के दौरान हुई मौत को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्रेशर संचालक मज़दूरों को करते हैं खुले आम शोषण, क्षेत्रीय अधिकारी की जवाबदारी क्या है?
आरोप है कि जिस उद्योग में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रबंधन की थी। वहां न तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और न ही श्रमिकों का दुर्घटना बीमा कराया गया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मजदूरों की जिंदगी की कीमत किसके लिए मायने रखती है? मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह आरोप सामने आया कि हादसे के बाद वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया।
मंगलवार को मृतक की मौत कार्य के दौरान क्रेशर की बेल्ट में फंसने या करंट लगने से हुई बात सामने आ रहा है? लेकिन प्रबंधन द्वारा परिजनों को गुमराह कर मौत को बीमारी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सच को दबाने का भी बनता है। ऐसे गरीब मजदूर परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया, जबकि उद्योग प्रबंधन और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही अब जांच के घेरे में है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा मृतक परिवार को उचित मुआवजा देने और श्रमिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या प्रदेश में श्रमिकों की सुरक्षा केवल कागजों पर है, या उनकी जिंदगी बचाने के लिए भी कोई जवाबदेह व्यवस्था मौजूद है? यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी मजदूर परिवारों की खुशियां छीनते रहेंगे।
बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान वह सिर के बल डस्ट के ढेर में गिरा और उसका आधा शरीर धूल के भीतर दब गया था। वहीं शरीर के कई हिस्सों पर लाल रंग और चोट जैसे निशान भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन निशानों और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल तस्वीरों के होने से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।
खनिज विभाग सारंगढ़ की छूट से कई अवैध क्रेशर संचालित.. हो रही मजदूरों की मौतें.. जिम्मेदार कौन?!!
लोगों के भरोसा आप जिला प्रशासन पर टिकी हुई है कि इस मुद्दे पर इस तरह से कार्यवाही करते हैं लेकिन सबसे बड़ी जरूरी बातें है कि दुर्घटना होने के बाद क्रेशर को सील किया जाए क्या प्रशासन अपनी नाकामियों को छिपा रही है? सवाल यह भी उठता है कि अगर क्रेशर अवैध रूप से संचालित था तो प्रशासन अब तक क्या कर रही थी? एक मजदूर के मौत के बाद क्रेशर सील होना कहां तक सही है? सारंगढ़ खनिज विभाग की नाकामियों और कर्तव्यों के प्रति विमुखता तथा निरंकुशता का एक जीता जागता सबूत सामने आया है जिसपर जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निष्पक्ष जवाबदेही और कार्यवाही तो बनती है।